Thursday, February 5, 2026
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Medical PG Counselling 2026: मेडिकल PG में लोकल छात्रों की बल्ले-बल्ले, बाहरी छात्रों को मिली बेहद कम सीटें, ओपन कोटा में नहीं दिखी रुचि

Medical PG Counselling 2026: मेडिकल PG काउंसलिंग के दूसरे राउंड में इस बार एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण ट्रेंड देखने को मिला है। प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में जारी हुई मेरिट सूची में अन्य राज्यों के 56 छात्रों के नाम शामिल थे, लेकिन च्वाइस फिलिंग नहीं करने की वजह से सिर्फ दो छात्रों को ही MD-MS सीट आवंटित हुई। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाहरी राज्यों के छात्रों ने स्टेट ओपन कोटा में रुचि नहीं दिखाई, जिससे स्थानीय छात्रों को ज्यादा मौके मिले।


दूसरे राज्यों के 56 नाम, सिर्फ 2 को सीट — बाकी ने च्वाइस फिलिंग नहीं की

दूसरे राउंड में जारी मेरिट सूची में कुल 56 बाहरी छात्रों के नाम आए थे, लेकिन सीट आवंटन के दौरान सिर्फ दो छात्रों ने ही प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। बाकी छात्रों ने च्वाइस फिलिंग नहीं की, जिससे वे अपने निर्धारित MD-MS कोर्स की सीट से वंचित रह गए। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थित‍ि मेडिकल PG काउंसिलिंग में स्टेट ओपन कोटा की अनिश्चितता से जुड़ी है।


पहले राउंड में 14 सीटें मिलीं, सिर्फ 2 ने ही प्रवेश लिया

पहले राउंड के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं। पहले राउंड में बाहरी राज्यों के 14 छात्रों को सीटें मिली थीं, लेकिन सिर्फ दो ने ही एडमिशन लिया। बाकी 12 सीटें ब्लॉक हो गईं, जिन्हें दूसरे राउंड के लिए फिर से शामिल किया गया। छात्र संगठनों का कहना है कि ओपन स्टेट कोटा हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण बाहरी छात्र सीट मिलने के बाद भी प्रवेश लेने में असमंजस में हैं।


स्टेट ओपन कोटा हाईकोर्ट में — बाहरी छात्रों की हिचक

काउंसिलिंग प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार, स्टेट ओपन कोटा को लेकर चल रहे मामले पर अदालत का फैसला आने तक कई बाहरी छात्र रिस्क नहीं लेना चाहते। इस वजह से सीटें आवंटित होने के बावजूद प्रवेश नहीं हुआ, जबकि मेरिट के हिसाब से मौके उपलब्ध थे। दूसरे राउंड में प्रवेश की अंतिम तारीख 13 जनवरी तय की गई है।


स्थानीय छात्रों के लिए बड़ी राहत — ज्यादा सीटें उपलब्ध

बाहरी छात्रों द्वारा रुचि न दिखाने का सीधा फायदा प्रदेश के मेडिकल PG उम्मीदवारों को मिला है। दूसरे राउंड की शुरुआत से पहले PG की कुल 326 सीटें खाली थीं। इनमें 147 सीटें स्टेट ओपन कोटे की और 131 सीटें स्टेट इंस्टीट्यूशनल कोटे की थीं। यह संख्या मेडिकल PG चाहने वाले लोकल छात्रों को बेहतर विकल्प और कॉलेजों में प्रवेश की अधिक संभावनाएं देती है।


NRI सीटों पर भी रुचि कम, सिर्फ 25% सीटों पर एडमिशन

NRI कैटेगरी में भी इस बार खास रुचि नहीं देखने को मिली। कुल 38 NRI सीटों में 20 ओपन और 18 इंस्टीट्यूशनल कोटे की हैं। पहली काउंसलिंग के बाद PG में सिर्फ 25% सीटों पर प्रवेश हुआ था। सरकारी-निजी मेडिकल कॉलेजों में PG की कुल 593 सीटें हैं, जिनमें पहले चरण में सिर्फ 125 छात्रों ने एडमिशन लिया। वहीं सरकारी कॉलेजों के लिए 163 और निजी कॉलेजों के लिए 110 सीटों का आवंटन किया गया था।


PG एडमिशन की अंतिम तारीख 31 जनवरी, कॉलेजों में चिंता

दूसरे राउंड की अंतिम तारीख 13 जनवरी है, जबकि मेडिकल PG में प्रवेश की अंतिम तारीख 31 जनवरी तय की गई है। कॉलेज प्रशासनों का कहना है कि सीटें अधिक खाली रहने का असर अगले शैक्षणिक सत्र पर पड़ सकता है, खासकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और विभागों के संचालन पर।


राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सवाल — ओपन कैटेगरी स्टेट कोटे पर नहीं

मेडिकल शिक्षा के जानकारों का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी विचारणीय है। देश के किसी भी राज्य में स्टेट कोटे की PG सीटों पर ओपन कैटेगरी लागू नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह व्यवस्था विवाद और असमंजस का कारण बनी हुई है। अदालत के फैसले के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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