Thursday, February 5, 2026
HomeCG NewsCG News: मतदाता सूची पर सियासी भूचाल, 27 लाख+ नाम हटाने की...

CG News: मतदाता सूची पर सियासी भूचाल, 27 लाख+ नाम हटाने की तैयारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने सियासी गलियारों से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक हलचल पैदा कर दी है। आगामी चुनावी वर्ष में मतदाता सूची को “टाइट और क्लीन” करने की प्रक्रिया अब राजनीतिक रस्साकशी का नया केंद्र बन चुकी है। चुनाव आयोग को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले 27 लाख 40 हजार 759 फार्म-7 प्राप्त हुए हैं, जिनमें पुराने, अनकलेक्टेबल और अशुद्ध प्रविष्टियों को हटाने की मांग की गई है। इतने बड़े पैमाने पर विलोपन की मांग को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ चुनावी रणनीति में देख रहे हैं।


नए मतदाता सक्रिय, फॉर्म भरने की होड़
इस अभियान ने मतदाता जागरूकता का दिलचस्प पक्ष भी सामने रखा है। जहां लाखों नाम हटाने की शिकायतें दर्ज हैं, वहीं नई पीढ़ी अपने मताधिकार के लिए सक्रिय दिख रही है।

23 दिसंबर से शुरू पुनरीक्षण के दौरान अब तक—

  • 79,787 फार्म 6/6A नए नाम जोड़ने के लिए

  • 2,140 फार्म 7 नाम विलोपन के लिए

  • 23,096 फार्म 8 सुधार के लिए आए हैं

युवाओं, नवविवाहितों और स्थानांतरित मतदाताओं में बढ़ती जागरूकता को राजनीतिक विश्लेषक चुनावी संकेतों के रूप में देख रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि “डिमोग्राफी” से जुड़ा चुनावी खेल अभी शुरू ही हुआ है।


राजनीतिक दलों की Entry और दावों की बौछार
राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं और मतदाता सूची अब “सबसे बड़ा चुनावी रणक्षेत्र” बन चुकी है। केवल 15 दिनों में 1 करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 दावे और आपत्तियां दर्ज होना राज्य के राजनीतिक तापमान की झलक है।

दलवार आंकड़े भी दिलचस्प हैं—

  • भाजपा: 20,017 बीएलए, 183 दावे

  • कांग्रेस: 17,681 बीएलए, दावे सक्रिय

  • बसपा: 501 बीएलए

  • आम आदमी पार्टी: 119 बीएलए

  • जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे): 528 आवेदन

कुल मिलाकर दलों की तरफ से 38,846 दावे/आपत्तियां दी गईं, जिनमें से 228 मामलों पर कार्रवाई भी पूर्ण हो चुकी है।


शपथपत्र वाले मामलों में सन्नाटा
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा-2(ग) के तहत शपथपत्र आधारित आवेदन की सुविधा मौजूद है, लेकिन इस बार किसी भी आवेदन ने इस रास्ते का उपयोग नहीं किया। विशेषज्ञ इसे राजनीति में “पारदर्शिता और प्रत्यक्षता” की ओर बदलाव मान रहे हैं।


अधिकारियों की सफाई: ‘सूची शुद्ध करने का अभियान’
उप निर्वाचन अधिकारी नवीन ठाकुर ने प्रक्रिया को पूरी तरह प्रशासनिक बताया। उनके अनुसार—

“यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए है। केवल वही आवेदन मान्य होंगे जो निर्धारित फार्म एवं आवश्यक घोषणा के साथ आए हैं। सामान्य शिकायतें या बिना दस्तावेज के आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।”

चुनाव आयोग भी इस समय पूरे अभियान की मॉनिटरिंग में लगा है, ताकि अंतिम प्रकाशन से पहले विवाद न्यूनतम रहे।


राजनीतिक समीकरण और आगे की तस्वीर
मतदाता सूची का यह स्वरूप आगामी चुनाव का टोन सेट कर सकता है। बड़े पैमाने पर विलोपन और समावेशन दोनों ने सवाल उठाए हैं—
क्या हटाए गए नामों का झुकाव किसी विशिष्ट समाज या इलाके की ओर है?
क्या नए मतदाता चुनावी परिणाम को बदलने की काबिलियत रखते हैं?
और क्या दलों की सक्रियता आने वाले महीनों में और तेज होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में “डिमोग्राफिक बैलेंस” की लड़ाई अब पार्टी स्तर पर रणनीति का मुख्य हिस्सा बनेगी। यही वजह है कि मतदाता सूची आने वाले महीनों में सियासी बहस की धुरी बने रहने वाली है।


Impact: चुनावी राजनीति का नया ‘डेटा बैटल’
डिजिटल प्रक्रियाओं, फॉर्म आधारित वेरिफिकेशन और बड़े पैमाने पर डेटा-रिव्यू ने चुनावों को अब “डेटा बैटल फील्ड” के रूप में बदल दिया है। छत्तीसगढ़ में यह बदलाव अब प्रत्यक्ष तौर पर दिख रहा है। साफ है— अगला चुनाव भावनाओं से उतना ही लड़ा जाएगा, जितना डेटा, डिमोग्राफी और मतदाता संरचना पर।

छत्तीसगढ़ की हर अपडेट के लिए हमारे WhatsApp चैनल को फॉलो करें – https://whatsapp.com/channel/0029VbBj50DATRSgaSxCmo2v

साथ ही हमारे Facebook पेज से जुड़े – https://www.facebook.com/profile.php?id=61579881036814

sarthak@bohidar
sarthak@bohidarhttp://www.cginsights.in
Journalist and content professional based in India. I write clear, people-first stories across news, media, and digital platforms.
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments