Thursday, February 5, 2026
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Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में दूसरा हिंदू युवक पीट-पीटकर मारा गया, सरकार ने नकारा सांप्रदायिक एंगल, सियासी हलचल तेज

Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ ही दिनों पहले हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग के बाद अब राजबाड़ी जिले में एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या की घटना सामने आई है। मृतक की पहचान 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। यह घटना बुधवार रात करीब 11 बजे पांग्शा उपजिला में हुई, जो राजधानी ढाका से लगभग साढ़े तीन घंटे की दूरी पर है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमृत मंडल की मौत के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। हालांकि, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस घटना को सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने से इनकार किया है।

सरकार का दावा: सांप्रदायिक नहीं, आपराधिक मामला

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में इस घटना को लेकर “भ्रामक जानकारी” फैलाई जा रही है। सरकार के अनुसार, पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि अमृत मंडल की हत्या सांप्रदायिक कारणों से नहीं, बल्कि उगाही और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े विवाद के कारण हुई।

सरकारी बयान में कहा गया है कि अमृत मंडल एक सूचीबद्ध शीर्ष अपराधी था, जो कथित तौर पर इलाके में उगाही के लिए पहुंचा था। इसी दौरान स्थानीय लोगों के साथ हिंसक झड़प हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना को धार्मिक हिंसा के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ दिन पहले मयमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। दीपू चंद्र दास पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे पीट-पीटकर मारने के बाद शव को लटका दिया गया और फिर आग लगा दी गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा की थी।

लगातार दो हिंदू युवकों की हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व भारतीय मंत्री का तीखा हमला

इन घटनाओं पर भारत में भी सियासी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। भारत के पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि वहां “हिंदुओं के प्रति नफरत को एक विचारधारा के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है”

ANI से बातचीत में एमजे अकबर ने कहा कि बांग्लादेश इस समय “तुष्टिकरण के बड़े संकट” से गुजर रहा है, जहां सत्ता में बैठे लोग देश की सबसे कट्टर ताकतों को खुश करने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा अंतरिम सरकार ने शासन का कोई ठोस उदाहरण पेश नहीं किया है और इसी कारण ऐसे अपराधों को परोक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है।

एमजे अकबर ने कहा कि नफरत कभी भी विचारधारा नहीं हो सकती, लेकिन बांग्लादेश में कुछ ताकतें इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं।

हिंदू महाजोट का पीड़ित परिवार से मुलाकात

इसी बीच, बांग्लादेश नेशनल हिंदू महाजोट का एक प्रतिनिधिमंडल मयमनसिंह जिले के मोकामियाकान्दा गांव पहुंचा, जहां उसने लिंचिंग के शिकार दीपू चंद्र दास के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के केंद्रीय महासचिव मृत्युंजय कुमार रॉय ने किया।

प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और न्याय दिलाने की मांग दोहराई। संगठन ने कहा कि हिंदू समुदाय में डर का माहौल है और सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे।

सियासी पृष्ठभूमि में बढ़ी संवेदनशीलता

इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश की राजनीति में भी बड़ा घटनाक्रम हुआ है। देश के प्रमुख राजनीतिक नेता और संभावित प्रधानमंत्री उम्मीदवार तारीक रहमान 17 साल के आत्म-निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं। वापसी के बाद उन्होंने अगले साल होने वाले चुनावों में जीत मिलने पर सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का वादा किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों के बीच उनकी वापसी से राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा सकता है। अल्पसंख्यक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार जैसे मुद्दे आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय नजर और बढ़ता दबाव

लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के कारण बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी टिकी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक अधिकार समूहों की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।

सरकार भले ही घटनाओं को आपराधिक मामलों के रूप में देख रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर अल्पसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

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