Thursday, February 5, 2026
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CG Naxal Policy: 31 जनवरी तक ही माओवादियों के पास समर्पण का मौका, फरवरी से अभियान होगा और सख्त

CG Naxal Policy: माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रही मुहिम में सरकार अब निर्णायक चरण में प्रवेश करने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 जनवरी 2026 तक आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को ही पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके बाद यानी 1 फरवरी 2026 से आत्मसमर्पण की नीति प्रभावी रूप से समाप्त कर दी जाएगी और इसके बाद सरेंडर करने वाले माओवादियों को किसी भी तरह की पुनर्वास सुविधा नहीं दी जाएगी।

सरकार के इस फैसले को माओवादी हिंसा के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए साझा रणनीति तय

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 के लिए माओवादी विरोधी साझा रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस रणनीति के तहत जनवरी माह तक माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने का अंतिम अवसर दिया जाएगा, जबकि इसके बाद सुरक्षा बल पूरी ताकत के साथ अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करना है। इस संकल्प को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से दोहराया है।

1 फरवरी से बदलेगा अभियान का स्वरूप

सुरक्षा तंत्र से जुड़े राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से माओवादियों के खिलाफ लड़ाई का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। इसके बाद माओवादियों को उनकी मांद में घुसकर घेरने और जवाबी कार्रवाई को और अधिक आक्रामक किया जाएगा।

रणनीति के तहत सुरक्षा बल—

  • माओवादी ठिकानों को चारों ओर से घेरेंगे

  • लंबे समय तक चलने वाले सर्च ऑपरेशन चलाएंगे

  • संगठित और समन्वित कार्रवाई करेंगे

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा

अभी आत्मसमर्पण पर मिल रहे हैं ये लाभ

फिलहाल आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत कई सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें—

  • नकद प्रोत्साहन राशि

  • कौशल प्रशिक्षण

  • नौकरी या स्वरोजगार के लिए सब्सिडी

  • आवास सुविधा

शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।

प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा इस अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं और आत्मसमर्पण को बढ़ावा देने के लिए लगातार अपील की जा रही है।

कर्रेगुट्टा ऑपरेशन बना मॉडल

सरकार की नई रणनीति की नींव बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए सफल ऑपरेशन पर आधारित है। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ को ध्वस्त कर दिया था।

अब इसी मॉडल पर—

  • अन्य दुर्गम और सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा

  • माओवादियों की लॉजिस्टिक और कमांड क्षमता को कमजोर किया जाएगा

पड़ोसी राज्यों से भी मिलेगी मदद

माओवादी अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ से लगे पड़ोसी राज्यों से भी सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर बस्तर संभाग में अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा सकती है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस व्यापक अभियान को लेकर पूर्ण सहमति बन चुकी है और आने वाले महीनों में अभियान को और तेज किया जाएगा।

सरकार का स्पष्ट संदेश

सरकार ने माओवादियों को साफ संदेश दिया है कि—

  • 31 जनवरी 2026 तक आत्मसमर्पण का अंतिम अवसर है

  • इसके बाद पुनर्वास योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा

  • फरवरी से सुरक्षा बल निर्णायक कार्रवाई करेंगे

यह नीति माओवादी संगठन के भीतर नेतृत्व और कैडर दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।

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