Thursday, February 5, 2026
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DSP Love Trap: 28 लाख की ठगी में दीपक टंडन पर पुलिस की नरमी, छह गिरफ्तारी वारंट के बाद भी गिरफ्त से बाहर

DSP Love Trap: महिला डीएसपी पर लव ट्रैप का गंभीर आरोप लगाने वाले दीपक उर्फ अंबेडकर टंडन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र में 28 लाख रुपये की ठगी के मामले में पिछले दो साल के भीतर कोर्ट द्वारा छह बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बावजूद अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दीपका पुलिस कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभा रही है, जिससे आरोपी के हौसले लगातार बुलंद हैं।


28 लाख की ठगी का आरोप

ठगी का शिकार हुए कारोबारी महेंद्र सिंह, जो एसईसीएल दीपका की आवासीय कॉलोनी में रहते हैं, ने बताया कि वर्ष 2015-16 के दौरान दीपक टंडन ने कोयला परिवहन का बड़ा काम दिलाने का झांसा देकर उनसे किस्तों में करीब 28 लाख रुपये लिए थे। लंबे समय तक भरोसा दिलाने के बाद भी जब कोई काम नहीं मिला, तो पीड़ित परिवार ने पैसे वापस मांगने शुरू किए।

महेंद्र सिंह के पुत्र अंकित सिंह ने बताया कि टंडन ने पैसे लौटाने का भरोसा देकर उन्हें रायपुर स्थित अपने कार्यालय बुलाया। “उसने कहा कि 10 मिनट की मीटिंग है, बाहर बैठो। मैं सुबह से रात 10:30 बजे तक बाहर बैठा रहा। आखिर में अंदर गया तो उसने सिर्फ 500 रुपये थमा दिए,” अंकित ने बताया।


चेक बाउंस और आर्थिक तबाही

पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबाव बनाने पर दीपक टंडन ने रकम लौटाने के लिए दो चेक दिए, लेकिन दोनों ही बैंक में बाउंस हो गए। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

अंकित सिंह के अनुसार, इस पूरे तनाव के चलते उनके पिता को पैरालिसिस अटैक आ गया, जिससे एक हाथ और एक पैर पूरी तरह प्रभावित हो गया। परिवार की आमदनी रुकने से बच्चों की पढ़ाई तक छूट गई। अंकित और उनके भाई को मजबूरी में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। फिलहाल बड़ा भाई बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर किसी तरह घर का खर्च चला रहा है।


FIR दर्ज कराने में भी संघर्ष

पीड़ित परिवार का आरोप है कि दीपका पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में भी बेहद लापरवाही दिखाई। दिसंबर 2023 में काफी मशक्कत के बाद जाकर मामला दर्ज किया गया। इसके बाद जांच के नाम पर प्रक्रिया लंबी खिंचती रही, लेकिन ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।

अंकित सिंह का कहना है कि “हर बार पुलिस कहती है कि आरोपी नहीं मिल रहा। जबकि वह खुलेआम रायपुर और आसपास घूमता है। पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है।”


छह बार जारी हो चुका है गिरफ्तारी वारंट

जानकारी के मुताबिक, कटघोरा न्यायालय से पिछले दो वर्षों में दीपक टंडन के खिलाफ छह बार गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद एक भी वारंट पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई।

पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस की टीमें गिरफ्तारी के नाम पर रायपुर जाती हैं और ‘आरोपी नहीं मिला’ कहकर लौट आती हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वारंट के बावजूद टंडन कानून की पकड़ से बाहर कैसे है।


थाना प्रभारी का बयान

इस मामले में दीपका थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने कहा कि हाल ही में कोर्ट से एक नया गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले के वारंट की जानकारी उन्हें नहीं है।

हालांकि इस बयान के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं, क्योंकि लगातार जारी वारंट की जानकारी का अभाव खुद सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है।


अन्य पीड़ित भी सामने आने लगे

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सामने आया कि दीपक टंडन पर सिर्फ यही एक ठगी का आरोप नहीं है। सक्ती निवासी किशन शर्मा ने भी पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर 15 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। उन्होंने टंडन द्वारा दिए गए चेक की फोटोकॉपी भी सौंपी है।

इसके अलावा, दुर्ग जिले के एक बड़े कांग्रेस नेता के पुत्र के साथ भी ठगी की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।


DSP लव ट्रैप आरोपों से जुड़ा मामला

गौरतलब है कि दीपक टंडन हाल ही में महिला डीएसपी पर लव ट्रैप और गंभीर आरोप लगाने के बाद सुर्खियों में आया था। उस मामले के बाद से वह खुद को ‘पीड़ित’ बताकर लगातार बयानबाजी कर रहा है, लेकिन अब ठगी के मामलों में उसकी भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते गिरफ्तारी नहीं हुई, तो यह मामला न केवल पीड़ित परिवारों के लिए बल्कि पुलिस की साख के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।


न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ न्याय की उम्मीद है। उनका आरोप है कि यदि आरोपी पर समय रहते कार्रवाई होती, तो न जाने कितने लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकता था।

अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करते हैं, या फिर दीपक टंडन कानून की पकड़ से यूं ही बाहर बना रहेगा।

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