Thursday, February 5, 2026
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CG News: अनुमति चंगाई सभा, पास्टर बजरंग जायसवाल पर फिर आरोप, कटघोरा में धार्मिक तनाव की स्थिति

CG News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक बार फिर बिना अनुमति धार्मिक आयोजन को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। कटघोरा क्षेत्र में चंगाई सभा के आयोजन को लेकर हिंदू संगठनों और मसीही समाज आमने-सामने आ गए। मामला उस वक्त गंभीर हो गया जब बिना अनुमति सभा कराने के आरोप में पहले जेल जा चुके पास्टर बजरंग जायसवाल ने रिहाई के बाद दोबारा बड़ा धार्मिक आयोजन कर दिया। सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और मतांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया।


रिहाई के बाद फिर नियमों की अनदेखी

जानकारी के अनुसार, कटघोरा तहसील के तहसीलभाठा निवासी परिवर्तित ईसाई और पास्टर बजरंग जायसवाल पर पहले भी बिना अनुमति चंगाई सभा आयोजित करने का मामला दर्ज हो चुका है। करीब 20 दिन पहले उनके घर की छत पर टेंट लगाकर लाउडस्पीकर के जरिए तेज आवाज में धार्मिक प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। मोहल्ले के लोगों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

करीब पांच दिन पहले ही जेल से रिहा होने के बाद पास्टर जायसवाल ने एक बार फिर नियमों की अनदेखी करते हुए बड़ा आयोजन कर दिया। इस बार कटघोरा के बजाय सुतर्रा पेट्रोल पंप के पास खुले क्षेत्र में चंगाई सभा आयोजित की गई।


बड़े स्तर पर चंगाई सभा का आयोजन

बताया गया कि इस चंगाई सभा में न केवल स्थानीय ईसाई समुदाय, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों को भी बुलाया गया था। प्रार्थना के जरिए बीमारियों के इलाज और जीवन में बदलाव का दावा करते हुए सैकड़ों लोगों की मौजूदगी रही। मौके पर करीब 350 से अधिक मसीही समाज के लोग एकत्र थे।

कार्यक्रम की जानकारी जैसे ही हिंदू संगठनों को मिली, बजरंग दल, हिंदू महासभा, भारतीय जनता पार्टी और गौ सेवक संगठन से जुड़े करीब 50 से 60 कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।


मतांतरण के आरोप, नारेबाजी और झूमाझटकी

हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चंगाई सभा की आड़ में मतांतरण कराया जा रहा है। इसे लेकर मौके पर जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। वहीं मसीही समाज के लोगों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कार्यक्रम को शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन बताया।

दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ देर के लिए झूमाझटकी की स्थिति भी बनी। हालांकि पुलिस की मौजूदगी से बड़ा टकराव टल गया, लेकिन इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।


थाने पहुंचा मामला, दोनों पक्षों की शिकायत

शाम होते-होते दोनों पक्ष कटघोरा थाना पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। हिंदू संगठनों ने बिना अनुमति सभा और मतांतरण के प्रयास का आरोप लगाया, वहीं मसीही समाज ने धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डालने और कार्यक्रम को जबरन रोकने की शिकायत की।

पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों को दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने।


बिना सूचना कार्यक्रम पर कार्रवाई जारी: थाना प्रभारी

कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण सिंह ने बताया कि ग्राम सरपंच की ओर से बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसी भी सार्वजनिक धार्मिक आयोजन के लिए प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।


कटघोरा और कोरबा में बढ़ते धार्मिक विवाद

यह पहली बार नहीं है जब कोरबा जिले में इस तरह का विवाद सामने आया हो। हाल के दिनों में कई इलाकों में धार्मिक आयोजनों को लेकर तनाव की स्थिति बनी है।

  • नगर निगम क्षेत्र के ढोढीपारा में रात की प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा

  • ग्राम फरसवानी में एक पास्टर पर निवास परिसर में गिरजाघर चलाने और धर्म परिवर्तन का आरोप

  • नगर निगम क्षेत्र के रूमगढ़ा में सभा के दौरान मतांतरण को लेकर विवाद

  • ग्राम चैतमा में पास्टर द्वारा महिलाओं को सिंदूर-बिंदी न लगाने की सलाह पर शिकायत

  • तहसीलभाठा में पहले भी बजरंग जायसवाल के धार्मिक प्रचार पर आपत्ति

इन घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।


प्रशासन की अपील और आगे की चुनौती

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन की इजाजत नहीं दी जाएगी, चाहे वह किसी भी धर्म से जुड़ा हो। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है, लेकिन कानून और शांति व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो ऐसे मामले भविष्य में बड़े सांप्रदायिक तनाव का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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