CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। बकावंड ब्लॉक में एक पिता ने अपनी बेटी लीसा (Lisa) को 20 वर्षों तक एक अंधेरे और बंद कमरे में कैद कर रखा। हैरानी की बात यह है कि जब उसे कमरे में बंद किया गया था तब उसकी उम्र केवल 8 वर्ष थी, और जब उसे बचाया गया तब वह 28 वर्ष की हो चुकी थी।
रेस्क्यू टीम और प्रशासन के अधिकारी भी इस भयावह दृश्य को देखकर दंग रह गए। लड़की बेहद कमजोर और मानसिक रूप से आहत अवस्था में मिली। लगातार अंधेरे में रहने के कारण उसकी आंखों की रोशनी लगभग चली गई है।
कैसे सामने आया मामला
बकावंड क्षेत्र में कार्यरत एक सामाजिक संगठन को सूचना मिली कि एक घर के अंदर वर्षों से एक लड़की को कैद करके रखा गया है। सूचना सही पाई जाने पर प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पड़ोसियों और गांववालों को इस बारे में पहले कभी जानकारी नहीं थी, क्योंकि लड़की को घर के भीतर एक छोटे, बंद कमरे में रखा गया था, जहां:
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न रोशनी आने का रास्ता था

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न हवा के लिए कोई खिड़की
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न किसी से मिलने की अनुमति
दरवाजा खुलते ही कमरे में भारी बदबू थी और जमीन पर एक पुराना गद्दा, टूटा बर्तन और फटे हुए कपड़े रखे मिले।
पिता ने क्यों किया ऐसा?
पूछताछ में आरोपी पिता ने बताया कि वह डर के कारण बेटी को बंद करके रखता था:
“मुझे डर था कि बाहर जाने से कोई उसे परेशान या छेड़छाड़ न कर दे। इसलिए उसे बचाने के लिए कमरे में रखा।”
लेकिन बचाव दल ने इसे सुरक्षा की नहीं बल्कि क्रूर कैद की श्रेणी में बताया। विशेषज्ञों के अनुसार यह मानसिक और शारीरिक यातना का गंभीर मामला है।
लिसा की स्थिति
बचाई गई लड़की:
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बहुत कमजोर है और चलने-फिरने में दिक्कत है
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लगातार अंधेरे में रहने से उसकी दृष्टि लगभग समाप्त हो चुकी है

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भाषा और संवाद की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है
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मानसिक रूप से गंभीर ट्रॉमा में है
फिलहाल उसे मेडिकल केयर और मनोवैज्ञानिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पड़ोसी क्यों नहीं जान पाए?
स्थानीय लोगों ने कहा:
“हमने कभी किसी लड़की को नहीं देखा। हमें लगा कि लड़की शहर में रहती होगी।”
परिवार समाज से पूरी तरह अलग-थलग रहता था और बाहरी लोगों को घर में आने की अनुमति नहीं थी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पिता को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। मामला नाबालिग के अधिकारों के हनन, मानवाधिकार उल्लंघन और अमानवीय यातना की धाराओं में दर्ज किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने विशेष जांच टीम गठित की है।
मामले ने उठाए गंभीर सवाल
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
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क्या समाज में मानसिक स्वास्थ्य और जागरूकता का अभाव ऐसे हादसों को जन्म देता है?

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20 वर्षों तक यह मामला किसी की नजर में क्यों नहीं आया?
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ऐसी घटनाओं के लिए प्रशासनिक निगरानी प्रणाली क्यों सक्रिय नहीं रही?
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