Friday, February 6, 2026
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CG News: Raipur ISIS मॉड्यूल का बड़ा खुलासा, डार्क वेब पर हथियार खोज रहे थे दोनों किशोर, विदेशी नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन

CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पकड़े गए ISIS समर्थित पाकिस्तानी मॉड्यूल से जुड़े दो किशोरों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एटीएस की जांच में सामने आए नए तथ्य सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर माने जा रहे हैं। यह मामला केवल ‘पाक हैंडलर’ से संचालित नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बहुस्तरीय, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

विदेशों से भी संपर्क की पुष्टि

एटीएस द्वारा किए गए डिजिटल फॉरेंसिक रिव्यू में सामने आया कि दोनों किशोर न सिर्फ पाकिस्तान के ISIS मॉड्यूल से जुड़े डिजिटल हैंडलरों के संपर्क में थे, बल्कि उनके डिवाइस से विदेश में मौजूद कई अन्य यूजर्स के साथ चैट लॉग मिले हैं।
इन चैट्स में—

  • छद्म नाम

  • मास्क्ड अकाउंट

  • VPN-आधारित लोकेशन

  • विदेशी भाषा में निर्देश

  • कट्टरपंथी कंटेंट

  • टास्क-आधारित आदेश

—जैसे संकेत मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि नेटवर्क की संरचना बेहद संगठित और गुप्त थी।

सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क धीरे-धीरे किशोरों को बदलने और उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहा था।


डार्क वेब पर हथियारों की तलाश—सबसे बड़ा खतरा

फॉरेंसिक जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि दोनों किशोर डार्क वेब का उपयोग करके घातक हथियार खरीदने की कोशिश कर रहे थे
जांच में मिली जानकारी के अनुसार—

  • हथियारों की कैटेगरी

  • कीमत

  • उपलब्धता

  • हथियार की डिलीवरी के तरीके

  • भुगतान के माध्यम

—जैसी सूचियाँ उनके डिवाइस में पाई गईं।
यह स्पष्ट संकेत है कि वे सिर्फ कट्टरपंथी सामग्री देख ही नहीं रहे थे, बल्कि आगे की हिंसक गतिविधियों की तैयारी भी कर रहे थे।

एटीएस ने इस हिस्से को “हाई रिस्क कैटेगरी” में चिह्नित किया है और साइबर एक्सपर्ट्स की एक विशेष टीम डार्क वेब लॉग की गहराई से जांच कर रही है।


अरबी भाषा सीखने के पीछे की योजना

एटीएस को मिले मोबाइल और डिजिटल टूल्स से पता चला कि दोनों किशोर अरबी सीखने के कोर्स और ट्यूटोरियल का उपयोग कर रहे थे।
इसका उद्देश्य था—

  • विदेशी ISIS हैंडलरों से सीधे संवाद

  • कट्टरपंथी सामग्री को समझना

  • गुप्त कोडिंग वाले संदेशों का डिक्रिप्शन

  • इंटरनेशनल नेटवर्क में फिट होना

एटीएस सूत्रों का कहना है कि पाक मॉड्यूल इन किशोरों को धीरे-धीरे इंटरनेशनल ऑपरेशनल टीम में शामिल करने की तैयारी कर रहा था।


Instagram पर “ISIS Raipur” ग्रुप

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों किशोरों ने Instagram पर ‘ISIS Raipur’ नाम से एक ग्रुप बनाया था।
इस प्लेटफॉर्म पर वे:

  • कट्टरपंथी प्रतीक और पोस्ट

  • विदेशी प्रोफाइल्स से संपर्क

  • हिंसक वीडियो शेयर

  • स्थानीय स्तर पर युवाओं को जोड़ने की कोशिश

—जैसी गतिविधियाँ कर रहे थे।

यह ग्रुप एटीएस के लिए बेहद महत्वपूर्ण सबूत है, क्योंकि इसकी टाइमलाइन और मेंबर लिस्ट यह बताती है कि नेटवर्क रायपुर में भी फैलने की कोशिश कर रहा था।


जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ा

जैसे-जैसे डिजिटल सुराग मिलते गए, एटीएस की जांच रायपुर से निकलकर—

  • भिलाई

  • बिलासपुर

  • दुर्ग

  • मध्यप्रदेश

  • ओडिशा

  • और देश के अन्य राज्यों

तक फैल चुकी है। भिलाई से हिरासत में लिए गए चार युवकों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है, लेकिन उनके मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में ले लिए गए हैं।


धार्मिक शिक्षा देने वालों पर भी नजर

एटीएस टीम उन लोगों से भी पूछताछ करेगी—

  • जिन्होंने किशोरों को धार्मिक शिक्षा दी

  • जिनके संपर्क में बच्चे नियमित रहते थे

  • जिनके पास इनकी गतिविधियों की जानकारी हो सकती है

एटीएस का मानना है कि बच्चों के व्यवहार में आए अचानक बदलाव को कई लोगों ने महसूस किया होगा, इसलिए उनसे भी पूछताछ जरूरी है।


किशोरों को वर्षों तक किया गया ब्रेनवॉश

इस केस से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि यह देश के दुर्लभ मामलों में से एक है, जिसमें वर्षों तक किशोरों को—

  • कट्टरपंथ

  • झूठे ऐतिहासिक वीडियो

  • AI जनरेटेड अत्याचारों की कहानियाँ

  • धार्मिक उकसावे

  • विदेशी प्रचार तंत्र

के जरिए प्रभावित किया गया।
कश्मीर में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में बच्चों को इतने संगठित तरीके से टारगेट करने का यह पहला बड़ा मामला है।


निष्कर्ष: रायपुर ISIS मॉड्यूल सिर्फ शुरुआत—पूरे नेटवर्क की तलाश जारी

एटीएस की जांच यह साफ कर चुकी है कि यह मामला दो किशोरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। विदेशी नेटवर्क, डिजिटल कट्टरपंथ, डार्क वेब और सोशल मीडिया के संयोजन ने एक बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा किया है।

अब जांच कई स्तरों पर चल रही है—

  • डिजिटल फॉरेंसिक

  • विदेशी प्रोफाइल ट्रैकिंग

  • मानसिक ब्रेनवॉश पैटर्न

  • डार्क वेब हथियार खरीद प्रयास

  • सोशल मीडिया नेटवर्क

  • स्थानीय संपर्क

एटीएस आने वाले दिनों में इस मॉड्यूल से जुड़े और भी खुलासे कर सकती है।

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