Dantewada News: 3 अप्रैल 2025 को दंतेवाड़ा जिला जेल से फरार हुआ शातिर आरोपी महेंद्र दीवान आखिरकार करीब साढ़े सात महीने बाद पुलिस के हत्थे चढ़ गया। दंतेवाड़ा पुलिस ने उसे चितालंका कलारपारा जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी आसान नहीं थी, क्योंकि आरोपी लगातार ठिकाने बदलते हुए नारायणपुर, बीजापुर और बस्तर जिलों की सीमाओं में घूमता रहा, जहां कई बार रेड के दौरान वह पुलिस को मात देकर निकल गया।
कैसे हुआ था जेल ब्रेक?

महेंद्र दीवान वर्ष 2024 से चोरी के मामले में दंतेवाड़ा जिला जेल में सजा काट रहा था।
3 अप्रैल 2025 की शाम उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर मौका पाकर जेल की दीवार फांद ली।
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उसका साथी दीवार के उस पार ही पकड़ लिया गया।
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लेकिन महेंद्र अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकला।
जेल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद जिले भर में अलर्ट जारी हुआ और उसकी तलाश शुरू हुई।
सात महीने तक कैसे बचता रहा आरोपी?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महेंद्र दीवान बेहद चालाक और सतर्क प्रवृत्ति का है।
फरारी के दौरान उसने—
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बार-बार ठिकाना बदला
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जंगलों में छिपकर रहा
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दूर-दराज के गांवों के लोगों से सीमित संपर्क रखा
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मोबाइल फोन का बिल्कुल उपयोग नहीं किया
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रात में ही मूवमेंट किया
इन्हीं कारणों से पुलिस की कई रेड में वह पकड़ से बाहर निकलता रहा।
तीन जिलों में अभियान, कई रेड—फिर भी बच निकलता था
पुलिस ने पिछले सात महीनों में—
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नारायणपुर के जंगलों
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बस्तर के ग्रामीण इलाकों
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बीजापुर के पहाड़ी मार्गों
में कई बार सर्च अभियान चलाया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर. के. बर्मन के अनुसार,
“महेंद्र की गतिविधियों पर लगातार निगरानी थीं। कई मुखबिर तैनात किए थे, लेकिन आरोपी देर रात ठिकाना बदल देता था। वह जमीन से जुड़े संपर्कों का उपयोग बिना किसी टेक्नोलॉजी के करता था, इसलिए उसे ट्रैक करना मुश्किल होता गया।”
चितालंका जंगल से मिली बड़ी सफलता
11 नवंबर को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि महेंद्र दीवान चितालंका कलारपारा जंगल में छिपा है।
इस बार पुलिस ने मौके पर ही बड़े पैमाने पर घेराबंदी की योजना बनाई।
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4 टीमें बनाई गईं
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जंगल के अलग-अलग मार्गों को सील किया गया

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कई घंटे तक कांबिंग ऑपरेशन चला
आखिरकार पुलिस टीम ने आरोपी को घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
कई मामलों में आरोपी—तीन जिलों में दर्ज अपराध
महेंद्र दीवान के खिलाफ—
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सिटी कोतवाली दंतेवाड़ा,
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थाना गीदम,
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थाना परपा (जिला बस्तर)
में कई मामले दर्ज हैं।
चोरी, नकदी और सामान की लूट जैसे मामलों में उसका नाम पहले भी सामने आया था, जिसकी वजह से वह जेल में सजा काट रहा था।
कोर्ट में पेश, वापस जेल भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे बुधवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर पुनः जेल भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अब जेल ब्रेक मामले में भी आरोपी के खिलाफ अलग से कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
पुलिस ने माना—यह गिरफ्तारी बड़ी उपलब्धि
दंतेवाड़ा पुलिस के लिए यह एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन माना जा रहा है।
लगातार 7.5 महीने तक एक फरार कैदी का पकड़ से दूर रहना अपने आप में बड़ी चुनौती था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि—
“यह आरोपी उस तरह के स्थानीय नेटवर्क और जंगल मार्गों का उपयोग करता था जिन्हें केवल पुराने जानकार लोग ही आसानी से समझ सकते हैं। इसलिए उस तक पहुँचना मुश्किल था।”
मामले का महत्व क्यों बढ़ गया था?
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यह जेल ब्रेक का मामला था, इसलिए पुलिस और जेल प्रशासन दोनों पर दबाव था।
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आरोपी का लगातार फरार रहना कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा था।
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ग्रामीण इलाकों में उसकी मौजूदगी से चोरी की घटनाओं की आशंका बनी रहती थी।
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सुरक्षा एजेंसियों पर यह सवाल था कि कब तक आरोपी गिरफ्त से बाहर रहेगा।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।
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