Raigarh News: जिले के बनई क्षेत्र में सोमवार को पुलिस, वन विभाग और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध गांजा खेती के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 लाख रुपये मूल्य के गांजा पौधों को मौके पर ही जलाकर नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में की गई।
अभियान के दौरान टीम ने टिकायतपाली थाना क्षेत्र के भालुपानी पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरघाट, झांडीसाही, अनानसाही, रांटसाही और उलसुरा गांवों में छापेमारी की। जांच में पता चला कि करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर गांजे की अवैध खेती की जा रही थी। खेतों में 3 से 6 फीट ऊंचे पौधे लगे हुए थे, जो कटाई के लिए लगभग तैयार थे।
झारखंड से जुड़ा संगठित गिरोह का नेटवर्क

अधिकारियों के अनुसार यह खेती किसी छोटे स्तर पर नहीं की जा रही थी, बल्कि एक संगठित गिरोह के माध्यम से प्रणालीबद्ध तरीके से संचालित हो रही थी।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड के मादक पदार्थ तस्कर स्थानीय ग्रामीणों को लालच देकर इस काम में शामिल कर रहे थे।
“ग्रामीणों को कुछ रुपये का लालच देकर गांजा के बीज बोने और पौधों की देखभाल करने को कहा जाता था। कई लोगों को यह तक नहीं पता था कि यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित पौधा है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।
अधिकारियों का मानना है कि नशा तस्करी का यह नेटवर्क सीमावर्ती जिलों तक फैला हुआ है, जो छोटे किसानों और मजदूरों को झांसे में लेकर इस काम में लगाता है।
ग्रामीणों के सवाल — “इतनी बड़ी खेती की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?”
अवैध खेती के उजागर होने के बाद आबकारी और स्थानीय पुलिस विभाग की कार्यशैली पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह खेती महीनों से चल रही थी, पौधे पूरी तरह विकसित अवस्था में थे, फिर भी प्रशासन को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?
एक स्थानीय व्यक्ति ने नाराजगी जताते हुए कहा,
“अगर प्रशासन पहले जागता, तो इतनी बड़ी मात्रा में गांजा उगाया ही नहीं जा सकता था। यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय है।”
स्थानीयों का मानना है कि प्रशासन को केवल पौधे जलाने से आगे बढ़कर, तस्करों और फाइनेंसरों की जड़ तक पहुंचना होगा।
अधिकारियों की चेतावनी — “अब किसी को नहीं मिलेगी छूट”
संयुक्त कार्रवाई में शामिल अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अब इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“हमारा लक्ष्य सिर्फ गांजा पौधों को नष्ट करना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क का सफाया करना है। इसमें जो भी लोग शामिल पाए जाएंगे, उन पर कानूनी धाराओं के तहत गिरफ्तारी की जाएगी।”
सूत्रों के अनुसार, आरोपी गिरोह के कुछ सदस्य झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हैं, जिनकी तलाश के लिए स्पेशल टीम गठित की जा रही है।
10 लाख रुपये मूल्य के पौधे किए गए नष्ट
अभियान के दौरान पुलिस, वन और आबकारी विभाग की टीम ने करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में उगाए गए पौधों को मौके पर ही जला दिया।
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक पौधे की अनुमानित कीमत ₹1,500 से ₹2,000 के बीच है। इस प्रकार कुल मिलाकर ₹10 लाख से अधिक मूल्य का गांजा नष्ट किया गया।
टीम में टीआई टिकायतपाली, रेंजर अधिकारी, आबकारी निरीक्षक और नायब तहसीलदार शामिल रहे। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि आगे की जांच में इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
जनजागरूकता और वैकल्पिक आजीविका पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ग्रामीण और वन क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण लोग इस तरह की अवैध गतिविधियों की ओर आकर्षित होते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी माना है कि सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है —
ग्रामीणों को जागरूक करने और वैकल्पिक आजीविका के विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“हम आने वाले दिनों में गांवों में जागरूकता अभियान चलाएंगे। जिन किसानों को लालच देकर इस काम में लगाया गया, उन्हें मुख्यधारा में लौटाने का प्रयास किया जाएगा।”
बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासन अलर्ट
अवैध खेती उजागर होने के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है।
संवेदनशील गांवों की पहचान कर वहां ड्रोन सर्वे और सर्च ऑपरेशन चलाने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस ने कहा कि “जो भी व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाएगा, उस पर एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
निष्कर्ष
बनई का यह मामला यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित नशा कारोबार धीरे-धीरे पैर पसार रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, परंतु इससे आगे बढ़कर आवश्यकता है —
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स्थायी निगरानी तंत्र,
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जन-जागरूकता कार्यक्रम,
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और ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाओं की।
सवाल अब यह है कि क्या यह कार्रवाई एक सिंगल डे ऑपरेशन बनकर रह जाएगी या इस अवैध हरियाली की जड़ तक पहुंचने की सच्ची मुहिम शुरू होगी।
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