Raigarh News: सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़ा एक चिंताजनक मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक 25 वर्षीय युवक ने इंस्टाग्राम के माध्यम से एक नाबालिग छात्रा (16 वर्ष) से दोस्ती कर उसे झांसे में लेने की कोशिश की। आरोपी युवक ने चालाकी से खुद को छात्रा का रिश्तेदार बताकर स्कूल में प्रवेश किया और छुट्टी दिलाकर उसे अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की सतर्कता और परिजनों की त्वरित प्रतिक्रिया से यह बड़ी वारदात टल गई और आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
इंस्टाग्राम से शुरू हुई दोस्ती
मामले की जानकारी के अनुसार, आरोपी आशीष भगत पिता मोहन भगत (उम्र 25 वर्ष), निवासी केलो विहार, रायगढ़ का है। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय था और इंस्टाग्राम के माध्यम से नाबालिग छात्रा से संपर्क में आया। कुछ दिनों की बातचीत के बाद आरोपी ने छात्रा से नज़दीकी बढ़ाने की कोशिश की और उसे भ्रमित कर मिलने का दबाव डालने लगा।

छात्रा ने शुरू में उसकी बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन आरोपी ने लगातार चैटिंग और वीडियो कॉल के जरिए उस पर मानसिक दबाव बनाया। आरोपी ने खुद को छात्रा का दूर का रिश्तेदार बताते हुए उसका विश्वास जीतने की कोशिश की।
स्कूल पहुंचा आरोपी, रिश्तेदार बनकर मांगी छुट्टी
8 नवंबर की सुबह आरोपी मारुति सुजुकी कार से छात्रा के स्कूल पहुँचा। उसने वहां के शिक्षकों से कहा कि वह छात्रा का रिश्तेदार है और घर में किसी जरूरी काम के कारण उसे ले जाना है।
स्कूल प्रबंधन ने नियम के तहत छात्रा के परिजनों से फोन पर संपर्क किया। जब पिता को जानकारी दी गई कि एक युवक बेटी को ले जाने आया है, तो वे तुरंत स्कूल पहुँचे।
पिता के पहुंचते ही स्थिति साफ हुई कि युवक उनका कोई रिश्तेदार नहीं है। पूछताछ में छात्रा ने बताया कि वही व्यक्ति है जो पिछले चार दिनों से इंस्टाग्राम पर उससे बातचीत कर रहा था और मिलने के लिए दबाव डाल रहा था।
पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार
स्कूल प्रबंधन और परिजनों ने तत्काल चक्रधरनगर थाने को सूचना दी। थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लिया गया।
प्रार्थी की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 78(2) एवं 333 भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध दर्ज किया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया और बताया कि उसने छात्रा को इंस्टाग्राम पर देखा था और उससे दोस्ती करने के उद्देश्य से यह पूरा षड्यंत्र रचा था।

पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी चैट हिस्ट्री की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में छात्रा से लगातार इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप चैटिंग के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गतिविधियों को देखते हुए साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि पता लगाया जा सके कि क्या उसने अन्य लड़कियों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश की थी।
पुलिस की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई
इस पूरे मामले में चक्रधरनगर पुलिस की तेज़ कार्रवाई और सतर्कता की सराहना की जा रही है। पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग कुमार पटेल के निर्देशन में उप निरीक्षक गेंदलाल साहू, सहायक उप निरीक्षक नंदकुमार सारथी और उनकी टीम ने महज कुछ घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
एसपी दिव्यांग कुमार पटेल ने कहा —
“सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए माता-पिता को सजग रहने की ज़रूरत है। पुलिस हमेशा ऐसी घटनाओं को रोकने और अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिए तत्पर है। हम सभी से अपील करते हैं कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखें।”
पुलिस की अपील — बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर रखें निगरानी
पुलिस ने इस घटना के बाद समाज से अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सतर्क निगरानी रखें।
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बच्चों को सिखाएं कि अनजान व्यक्तियों से बातचीत या निजी जानकारी साझा न करें।
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स्कूल प्रशासन से कहा गया है कि किसी भी छात्र को बिना अभिभावक की लिखित अनुमति के स्कूल से न जाने दिया जाए।

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पुलिस ने यह भी कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के मोबाइल पर सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स और समय सीमा तय करें।
स्कूल प्रबंधन की भूमिका सराहनीय
स्कूल प्रबंधन की सतर्कता के कारण ही यह बड़ी वारदात टल गई। स्कूल के एक शिक्षक ने बताया —
“युवक का व्यवहार संदिग्ध लग रहा था। वह जल्दीबाज़ी में छात्रा को ले जाना चाहता था। हमने तुरंत छात्रा के परिजनों को फोन किया। समय रहते परिजन आ गए और पुलिस को सूचना दे दी।”
स्कूल प्रशासन ने इस घटना के बाद सभी शिक्षकों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी परिस्थिति में बिना पहचान सत्यापन के किसी भी व्यक्ति को छात्र से मिलने की अनुमति न दी जाए।
डिजिटल सतर्कता की ज़रूरत
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सोशल मीडिया का गलत उपयोग किस तरह से खतरनाक साबित हो सकता है।
इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म आज युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल कर अपराधी बच्चों को निशाना बनाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि 90% ऐसे मामलों में आरोपी पहले सोशल मीडिया पर ‘दोस्त’ बनते हैं, धीरे-धीरे व्यक्तिगत बातें करते हैं और फिर मिलने का लालच देते हैं।
यह घटना अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों दोनों के लिए चेतावनी है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर समय रहते कदम उठाए जाएं।
निष्कर्ष
रायगढ़ पुलिस की सतर्कता और स्कूल प्रशासन की सूझबूझ से एक नाबालिग छात्रा संभावित अपराध से बच गई। आरोपी अब जेल में है और पुलिस उसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।
यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए भी एक नया प्लेटफॉर्म बन गया है।
इसलिए बच्चों को जागरूक बनाना, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना और डिजिटल जिम्मेदारी सिखाना अब हर परिवार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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