Thursday, February 5, 2026
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Raigarh News: तराईमाल स्थित सिंघल एनर्जी में बड़ा हादसा, फर्नेस लाइनिंग सेक्शन में दो सुपरवाइजर झुलसे, रायपुर रेफर फर्नेस की लैंसिंग सफाई के दौरान गर्म डस्ट की चपेट में आए कर्मचारी, औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

Raigarh News: जिले के तराईमाल स्थित सिंघल एनर्जी स्टील प्लांट में शनिवार दोपहर एक गंभीर औद्योगिक हादसा हुआ। प्लांट के फर्नेस लाइनिंग सेक्शन में लैंसिंग सफाई के दौरान गर्म डस्ट के संपर्क में आने से दो सुपरवाइजर झुलस गए। हादसे के बाद दोनों को इलाज के लिए रायगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें गंभीर स्थिति में रायपुर रेफर कर दिया गया है।

घटना शनिवार दोपहर लगभग 1:30 बजे की बताई जा रही है। हादसे के समय सुपरवाइजर फते बहादुर सिंह (45 वर्ष) और इंद्रजीत कुमार यादव (35 वर्ष) फर्नेस में जमा स्लैग और मेटल डस्ट की सफाई का काम कर रहे थे।


कैसे हुआ हादसा — गर्म डस्ट में पानी डालने से बना भाप का विस्फोट

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों सुपरवाइजर फर्नेस लाइनिंग पेंचिंग के दौरान बंद पड़ी भट्टी में जमे मेटल स्लैब को हटाने का कार्य कर रहे थे।
भट्ठी के अंदर अत्यधिक गर्मी थी और जमी हुई परत को काटने के लिए लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया जा रहा था। जैसे ही उन्होंने स्लैग पर पानी डाला, भीतर मौजूद गर्म डस्ट और केमिकल पदार्थ भाप में बदल गए और तेज़ दबाव के साथ उछलकर दोनों कर्मचारियों के चेहरे और शरीर पर आ गिरे।

भाप और गर्म डस्ट के संपर्क में आने से दोनों सुपरवाइजरों की आंखें और चेहरा झुलस गए। आसपास मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत अलार्म बजाया और दोनों को बाहर निकाला।



पहले प्लांट में इलाज, फिर रायगढ़ से रायपुर रेफर

प्लांट प्रबंधन की ओर से तत्काल प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई।
इसके बाद घायलों को तुरंत रायगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों की आंखों में गर्म स्टीम जाने के कारण कॉर्निया और त्वचा पर जलन गंभीर है।
स्थिति को देखते हुए दोनों को रायपुर के विशेष नेत्र एवं बर्न यूनिट हॉस्पिटल में रेफर किया गया है।


प्रबंधन ने कहा — “घायलों को हर संभव मदद दी जा रही है”

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि यह हादसा सफाई प्रक्रिया के दौरान हुआ, जब गर्म डस्ट पर गलती से पानी डाल दिया गया था।

“हमारी प्राथमिकता घायलों का इलाज है। कंपनी की ओर से सभी चिकित्सीय सुविधाएं और सहायता दी जा रही हैं। हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।” — कंपनी प्रवक्ता



औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

रायगढ़ जिला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन औद्योगिक हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।
पिछले कुछ महीनों में जिले के कई उद्योगों — जिनमें इस्पात, पावर और कोल वॉशरी यूनिट शामिल हैं — में सुरक्षा लापरवाही के चलते छोटे-बड़े हादसे हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर सिर्फ कागज़ों में दिखाया जाता है।
मजदूरों और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया जाता और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) का उपयोग सीमित है।


औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की निगरानी

हादसे की सूचना मिलते ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने कहा कि प्लांट प्रबंधन से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और यह जांच की जा रही है कि सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया —

“फर्नेस लाइनिंग या स्लैग हटाने जैसे कार्य उच्च जोखिम वाले होते हैं। ऐसे कार्यों में सेफ्टी गियर, तापमान मॉनिटरिंग और वाटर-स्टीम कंट्रोल सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”


रायगढ़ में बढ़ते औद्योगिक हादसे — आंकड़ों में चिंता

रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख औद्योगिक हब है, जहां सैकड़ों छोटे-बड़े स्टील, पावर और मेटल इंडस्ट्री संचालित हैं।
लेकिन बीते एक वर्ष में यहां औद्योगिक दुर्घटनाओं के 25 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई श्रमिकों की मौतें भी शामिल हैं।

श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि कई उद्योग “24×7 उत्पादन दबाव” के कारण मशीनों का रखरखाव और सुरक्षा जांच समय पर नहीं करते।
इससे कर्मचारियों की जान को खतरा बढ़ जाता है।



विशेषज्ञों का सुझाव — नियमित सुरक्षा ऑडिट जरूरी

औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हर उद्योग को प्रत्येक तीन माह में सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए।
फर्नेस या बर्निंग यूनिट में काम करने वाले कर्मचारियों को “थर्मल सेफ्टी ट्रेनिंग” दी जानी चाहिए और काम के दौरान लगातार तापमान निगरानी रखी जानी चाहिए।

इसके अलावा, कार्यस्थल पर आपातकालीन मेडिकल टीम और प्राथमिक उपचार किट हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए।


घायलों की हालत स्थिर, जांच जारी

फिलहाल दोनों झुलसे सुपरवाइजर रायपुर के अस्पताल में उपचाररत हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति अब स्थिर है, हालांकि आंखों के उपचार में कुछ समय लग सकता है।
वहीं, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने इस हादसे को लेकर जांच रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर यदि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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