CG Breaking News: छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन को बड़ा झटका देते हुए उदंती एरिया कमेटी के शीर्ष नक्सली सुनील उर्फ जगतार ने शुक्रवार को अपनी पत्नी अरेना उर्फ सुगरो समेत 7 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस को 6 आधुनिक हथियार भी सौंपे।
आत्मसमर्पण के बाद सुनील ने मीडिया के सामने अपने 25 वर्षों के माओवादी जीवन के अनुभव साझा किए और जंगल में बचे साथियों को एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने की चेतावनी दी।
सुनील का अल्टीमेटम — “एक हफ्ते में सरेंडर करो, वरना खुद जिम्मेदार रहोगे”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनील ने कहा,
“मैं अपने साथियों को एक हफ्ते का समय देता हूं। अगर वे इस दौरान आत्मसमर्पण करते हैं, तो मैं अपनी जिम्मेदारी पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करूंगा। अगर नहीं करते, तो जो होगा उसके जिम्मेदार वे खुद होंगे।”
सुनील ने बताया कि बीते वर्षों में माओवादी आंदोलन पूरी तरह अपना मूल उद्देश्य खो चुका है। संगठन में हिंसा, संदेह और अंदरूनी गुटबाजी ने विचारधारा को खत्म कर दिया है।
उन्होंने कहा कि नक्सल आंदोलन अब जनहित का नहीं, सत्ता और हिंसा का माध्यम बन गया है।

25 साल की हिंसक जिंदगी के बाद लिया बड़ा फैसला
सुनील उर्फ जगतार ने बताया कि उन्होंने करीब 25 साल जंगलों में माओवादी आंदोलन के लिए संघर्ष किया।
इस दौरान उन्होंने न केवल कई मुठभेड़ों को देखा, बल्कि अपने दर्जनों साथियों को जान गंवाते हुए अपनी आंखों के सामने गिरते देखा।
उन्होंने कहा,
“हथियार उठाने से कभी न्याय नहीं मिला। अब वक्त है कि हम हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।”
पत्नी के साथ किया आत्मसमर्पण, 6 हथियार सौंपे
सुनील ने अपनी पत्नी अरेना उर्फ सुगरो के साथ-साथ 7 सक्रिय नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण किया।
इनके पास से एक इंसास राइफल, दो एसएलआर, तीन 303 राइफलें, विस्फोटक और बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद हुए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन पर कई बड़े नक्सली हमलों में शामिल होने के आरोप हैं।
पुलिस और प्रशासन ने सरेंडर को बताया माओवादी संगठन के लिए झटका
बीजापुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सुनील का सरेंडर माओवादियों के लिए मानसिक और संगठनात्मक झटका है।
उन्होंने बताया कि सुनील का संगठन में बड़ा प्रभाव था और वह लंबे समय से उदंती और अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय था।
सरेंडर करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास सुविधा दी जाएगी।
“सरकार पुनर्वास नीतियों पर गंभीरता से अमल करे” — सुनील
सुनील ने सरकार से यह भी अपील की कि वह माओवादियों के लिए बनाई गई पुनर्वास योजनाओं को गंभीरता से लागू करे।
उन्होंने कहा,
“कई बार माओवादी आत्मसमर्पण करने के बाद भी समाज में असुरक्षित महसूस करते हैं।
सरकार अगर उन्हें वास्तविक अवसर दे तो वे पूरी तरह मुख्यधारा में लौट सकते हैं।”
अब जनता की आवाज उठाएंगे
सुनील ने कहा कि वे अब हिंसा छोड़कर क्षेत्रीय समस्याओं और जनता की आवाज उठाने का काम करेंगे।
उनका कहना था कि शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की कमी ही नक्सलवाद की जड़ है, इसलिए अब वे इन्हीं मुद्दों पर काम करेंगे।
विश्लेषण: नक्सल आंदोलन की कमजोर होती पकड़
विशेषज्ञों के अनुसार, सुनील जैसा वरिष्ठ कैडर का सरेंडर इस बात का संकेत है कि माओवाद की पकड़ अब कमजोर होती जा रही है।
बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और पुनर्वास योजनाओं ने कई शीर्ष नक्सलियों को हथियार डालने पर मजबूर किया है।
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