4th Day Of Navratri: नवरात्रि के पावन पर्व का आज चौथा दिन है, और इस दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की आराधना की जाती है। माना जाता है कि देवी कूष्मांडा ने अन्धकार को समाप्त कर सृष्टि की उत्पत्ति की थी। उनकी मुस्कान से उत्पन्न हुआ ब्रह्मांड ही उनके नाम का आधार माना जाता है—“कूष्मांड” यानी कूष्म (कद्दू) के समान ब्रह्मांड।
देशभर के मंदिरों में आज सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, विशेषकर दुर्गा पंडालों में जहां चौथे दिन विशेष पूजा, फलाहार और माता का विशेष श्रृंगार देखने को मिल रहा है।
कौन हैं मां कूष्मांडा? क्या है इनकी शक्ति
देवी का यह स्वरूप अत्यंत तेजस्वी, शांत और सृष्टि का आरंभ करने वाला माना गया है।
- इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है
- इनके हाथों में अमृत कलश, धनुष-बाण, कमल, चक्र, गदा आदि शस्त्र होते हैं
- मां कूष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती हैं और भक्तों को स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता का वरदान देती हैं
मान्यता है कि नियमित पूजा करने से कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होती है, और घर में खुशहाली आती है।
नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा विधि
पूजन परंपरागत रूप से सुबह ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल किया जाता है। आज भक्त इस प्रकार पूजा कर रहे हैं—
- स्नान करके साफ लाल या पीले वस्त्र पहनें
- पूजन स्थान को गंगाजल से पवित्र करें
- मां कूष्मांडा की प्रतिमा/चित्र को चौकी पर स्थापित करें
- कलश स्थापना (यदि पहले दिन नहीं की गई हो)
- देवी को कुमकुम, हल्दी, रोली, अक्षत, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें
- मां का प्रिय भोग—कद्दू (कूष्मांड), मालपुआ, खीर, शहद और फल चढ़ाएं
- मंत्र जाप करें और ध्यान लगाएँ
- अंत में आरती कर परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें
मां कूष्मांडा की शक्तिप्रद मंत्र साधना
भक्त आज मुख्य रूप से इस मंत्र का जाप कर रहे हैं:
“ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥”
यह मंत्र नवरात्र के चौथे दिन 108 बार जपना शुभ माना गया है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, ऊर्जा बढ़ती है और कार्यों में सफलता मिलती है।
दुर्गा चालीसा और ध्यान मंत्र
भक्त विशेष रूप से यह ध्यान मंत्र भी पढ़ते हैं:
“सूक्ष्म रूप धारण कर कूष्मांडा जगत की सृजनहार
अष्टभुजा रूपिणी दुर्गा, जय अम्बे जगदाधार।”
इस मंत्र के साथ ध्यान करने से माता की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
मां कूष्मांडा की आरती
आज मंदिरों में सबसे अधिक गाई जा रही आरती—
“जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी…” (आंशिक उद्धरण से अधिक नहीं)
इस आरती के साथ भक्त माता की ऊर्जा को अपने जीवन में स्थापित करने का संकल्प लेते हैं।
देशभर में उत्सव का माहौल
- प्रमुख शक्तिपीठों में भीड़ बढ़ी—कोल्हापुर, वाराणसी, जयपुर, छत्तीसगढ़ के डोंडीलोहारा और बिलासपुर के मंदिरों में लंबी कतारें
- कई राज्यों में आज कूष्मांडा स्पेशल श्रृंगार किया गया
- दुर्गा पंडालों में स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिवारिक सुख की कामना के साथ विशेष हवन
दिल्ली, कोलकाता और रायपुर में प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है।
आध्यात्मिक महत्व: क्यों खास है चौथा दिन
- यह दिन अनाहत चक्र की साधना से जुड़ा है
- माना जाता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से जीवन में अंधकार का नाश होता है
- विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यवसायियों के लिए विशेष शुभ माना जाता है
Impact & Relevance
नवरात्रि भारत की सबसे व्यापक रूप से मनाई जाने वाली आध्यात्मिक परंपरा है। मां कूष्मांडा की पूजा न केवल धार्मिक श्रद्धा का विषय है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शक्ति और परिवारिक समृद्धि का भी प्रतीक है। त्योहार के चौथे दिन देशभर में उमड़ी आस्था हमारे समाज की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती है।
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